हलाल का अर्थ है जायज़: जिसकी अल्लाह (﷾) अनुमति देता है। हराम का अर्थ है मना। इस्लाम उदारता से शुरू होता है: लगभग सब कुछ हलाल है, और मना की गई चीज़ें थोड़ी हैं, जिन्हें क़ुरआन और पैगंबर (ﷺ) ने बताया है। उनमें से हर एक किसी चीज़ की रक्षा करती है: शरीर, बुद्धि, परिवार, या लोगों का धन। अगर आप इस्लाम में नए हैं, तो आपको यह सब एक साथ सीखना ज़रूरी नहीं। ईमान पहले आता है, और बाक़ी सब क़दम-क़दम पीछे आता है।

क़ुरआन 2:168
ऐ लोगो! उन चीज़ों में से खाओ जो धरती में ह़लाल, पाकीज़ा हैं और शैतान के पदचिह्नों का अनुसरण न करो। निःसंदेह वह तुम्हारा खुला शत्रु है।

(क़ुरआन 2:168)

एक नज़र में

हलाल: हर अच्छी और पाक चीज़। सारे फल, सब्ज़ियाँ, अनाज, दूध, अंडे और मछली; जायज़ जानवरों का माँस जिन्हें इस्लामी तरीक़े से ज़बह किया गया हो; पानी और हर वह पेय जो नशा न दे; पति और पत्नी के बीच विवाह और अंतरंगता; ईमानदार व्यापार और ईमानदार काम।

क़ुरआन 2:168क़ुरआन 5:5

हराम: सूअर का माँस, ख़ून, अपने आप मरे हुए जानवर का माँस, और अल्लाह (﷾) के सिवा किसी और के नाम पर चढ़ाया गया माँस; शराब और हर नशा देने वाली चीज़; जुआ; ब्याज (रिबा); और विवाह के बाहर यौन संबंध।

क़ुरआन 2:173क़ुरआन 5:90क़ुरआन 2:275क़ुरआन 17:32

इस्लाम कैसे तय करता है

क़ुरआन इस बात से सावधान करता है कि जिसे अल्लाह (﷾) ने हलाल किया है उसे हराम ठहराया जाए, और इससे भी कि कोई अपनी मर्ज़ी से किसी चीज़ को हलाल या हराम कहे।

क़ुरआन 16:116

क़ुरआन 5:87
ऐ ईमान वालो! उन स्वच्छ पवित्र चीज़ों को, जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए हलाल (वैध) की हैं, हराम (अवैध) न ठहराओ और सीमा से आगे न बढ़ो। निःसंदेह अल्लाह हद से आगे बढ़ने वालों से प्रेम नहीं करता।

(क़ुरआन 5:87)

पैगंबर (ﷺ) ने बताया कि हलाल साफ़ है और हराम साफ़ है, और उनके बीच कुछ संदिग्ध चीज़ें हैं जिन्हें बहुत से लोग नहीं जानते। जो संदिग्ध चीज़ों से दूर रहता है, वह अपने दीन और अपनी इज़्ज़त की रक्षा करता है।

Sahih al-Bukhari 52

जहाँ कोई बात साफ़ न हो, या आलिमों में मतभेद हो, वहाँ मुसलमान किसी योग्य आलिम से पूछता है।

खाना

क़ुरआन 2:173
उस (अल्लाह) ने तो तुमपर केवल मुर्दार और ख़ून और सूअर का माँस और हर वह चीज़ हराम की है, जिसपर ग़ैरुल्लाह (अल्लाह के अलावा) का नाम पुकारा जाए।

(क़ुरआन 2:173)

इसलिए सूअर का माँस, ख़ून और अपने आप मरे हुए जानवर का माँस हराम है, और वह माँस भी जो अल्लाह (﷾) के सिवा किसी और के नाम पर चढ़ाया गया हो। पैगंबर (ﷺ) ने नुकीले दाँतों वाले शिकारी जानवरों और पंजों वाले पक्षियों को खाने से भी मना किया। ईमान वाला वही खाता है जो अच्छा और पाक हो, और याद रखता है कि उसे यह किसने दिया।

Sahih Muslim 1934

फल, सब्ज़ियाँ, अनाज, दूध और अंडे हलाल हैं। मछली भी हलाल है, जिसे ज़बह करने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि क़ुरआन समुद्र के खाने को जायज़ ठहराता है। दूसरे समुद्री जीवों पर, और जिलेटिन जैसी चीज़ों पर, मसलकों में मतभेद है।

क़ुरआन 5:96

अगर कोई ज़रूरत से मजबूर हो, और खाने को कुछ और न हो, तो क़ुरआन कहता है कि उस पर वह चीज़ खाने में कोई गुनाह नहीं जो वरना मना होती।

क़ुरआन 2:173

खाने से पहले बिस्मिल्लाह कहें: अल्लाह (﷾) के नाम से। पैगंबर (ﷺ) ने अपने दस्तरख़ान पर एक लड़के से कहा कि अल्लाह (﷾) का नाम ले, अपने दाहिने हाथ से खाए, और अपने सामने से खाए।

Sahih al-Bukhari 5376

माँस

माँस तब हलाल है जब वह किसी जायज़ जानवर का हो, जिसे तेज़ धार से गले पर ज़बह किया गया हो, और उस पर अल्लाह (﷾) का नाम लिया गया हो। पैगंबर (ﷺ) ने बताया कि अल्लाह (﷾) ने हर चीज़ में अच्छाई का आदेश दिया है: जब ज़बह करो, तो अच्छे से ज़बह करो, अपनी छुरी तेज़ करो और जानवर को तकलीफ़ से बचाओ।

क़ुरआन 6:121Sahih Muslim 1955

क़ुरआन अहले किताब, यानी यहूदियों और ईसाइयों, के खाने की भी अनुमति देता है। आज बिकने वाले माँस पर यह कैसे लागू होता है, और बेहोश करने और मशीन से ज़बह करने पर, आलिमों में मतभेद है, इसलिए बहुत से मुसलमान हलाल कसाई से या किसी भरोसेमंद हलाल लेबल के साथ ख़रीदते हैं।

क़ुरआन 5:5

पेय

क़ुरआन 5:90
ऐ ईमान वालो! बात यही है कि शराब, जुआ, देवथान और फ़ाल निकालने के तीर सर्वथा गंदे और शैतानी कार्य हैं। अतः इनसे दूर रहो, ताकि तुम सफल हो।

(क़ुरआन 5:90)

पैगंबर (ﷺ) ने बताया कि हर नशा देने वाली चीज़ ख़म्र है (क़ुरआन में शराब और तेज़ पेय के लिए शब्द), और हर नशा देने वाली चीज़ हराम है। इसलिए बीयर, वाइन, स्पिरिट और नशा देने वाली ड्रग्स हराम हैं। ये ईश्वर (﷾) की दी हुई बुद्धि पर पर्दा डाल देती हैं, और उसके साथ नमाज़, परिवार और सड़क को भी नुक़सान पहुँचाती हैं। पानी, दूध, जूस, चाय और कॉफ़ी हलाल हैं।

Sahih Muslim 2003

विवाह में अंतरंगता

इस्लाम अंतरंगता को शर्म की बात नहीं मानता। विवाह के भीतर यह हलाल है, और इस पर सवाब भी है। पैगंबर (ﷺ) ने बताया कि पुरुष के अपनी पत्नी के साथ अंतरंग होने में भी सदक़ा है। सहाबा ने पूछा कि किसी इच्छा को पूरा करने पर सवाब कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा: अगर वह इसे किसी हराम तरीक़े से करता, तो क्या उस पर गुनाह न होता? इसलिए जब वह इसे जायज़ तरीक़े से करता है, तो उसे सवाब मिलता है।

Sahih Muslim 1006

क़ुरआन 2:187
वे तुम्हारे लिए वस्त्र हैं तथा तुम उनके लिए वस्त्र हो।

(क़ुरआन 2:187)

क़ुरआन 17:32
और व्यभिचार के निकट भी न जाओ। निःसंदेह वह निर्लज्जता (अश्लीलता) तथा बुरी राह है।

(क़ुरआन 17:32)

विवाह के भीतर कुछ चीज़ें मना हैं। पत्नी के मासिक धर्म के दौरान दंपति संभोग नहीं करते: क़ुरआन कहता है कि मासिक धर्म की स्थिति में स्त्रियों से अलग रहो जब तक वे पाक न हो जाएँ, और पैगंबर (ﷺ) ने कहा: संभोग के सिवा सब कुछ करो। यह कहाँ तक जाता है, इस पर मसलकों में मतभेद है।

क़ुरआन 2:222Sahih Muslim 302

क़ुरआन पत्नी को खेती कहता है, यानी वह जगह जहाँ बीज बोया जाता है, और पति को उसके पास जब और जैसे चाहे आने देता है। इब्न कसीर समझाते हैं कि इससे गुदा मैथुन हराम हो जाता है, और आलिमों की भारी बहुसंख्या ने इसकी निंदा की।

क़ुरआन 2:223Tafsir Ibn Kathir, on 2:223

जीवनसाथी के यौन द्रवों को निगलना कम से कम नापसंद (मकरूह) है, क्योंकि वे गंदे हैं, और क़ुरआन कहता है कि पैगंबर (ﷺ) “उनपर अपवित्र चीज़ों को हराम (अवैध) ठहराता है”। बहुत से आलिम इसे हराम कहते हैं: नववी ने इसे सही राय कहा। दूसरे, जैसे मिस्र का दार अल-इफ़्ता, इसे मकरूह कहते हैं, और अगर इससे नुक़सान हो तो हराम।

क़ुरआन 7:157Islamweb fatwa 89730Dar al-Ifta al-Misriyya, fatwa 6804

रमज़ान के रोज़े के दिन के समय में, या इहराम में, यानी हज या उमरे पर हाजी की स्थिति में, संभोग नहीं होता। उसके बाद नमाज़ पढ़ने से पहले दोनों पूरे शरीर को धोते हैं (ग़ुस्ल)।

क़ुरआन 2:187क़ुरआन 2:197क़ुरआन 5:6

पति और पत्नी के बीच जो होता है, वह उन्हीं के बीच रहता है। पैगंबर (ﷺ) ने बताया कि क़यामत के दिन अल्लाह (﷾) के सामने सबसे बुरे लोगों में वह पुरुष है जो अपनी पत्नी से अंतरंग होता है और फिर उसका राज़ फैला देता है।

Sahih Muslim 1437

जब क़ुरआन उतर रहा था, तब सहाबा अज़्ल (वीर्य बाहर निकालना) करते थे। गर्भनिरोध और विवाहित जीवन के दूसरे सवालों पर आलिम मार्गदर्शन देते हैं।

Sahih al-Bukhari 5209

पैसा

क़ुरआन 2:275
अल्लाह ने व्यापार को ह़लाल (वैध) किया तथा ब्याज को हराम (अवैध) ठहराया।

(क़ुरआन 2:275)

इसलिए ब्याज (रिबा) हराम है, और जुआ भी। दोनों में कुछ लोग दूसरों के नुक़सान या ज़रूरत से अमीर होते हैं, जबकि व्यापार में जोखिम बाँटा जाता है। ईमानदार व्यापार में बरकत है: पैगंबर (ﷺ) ने बताया कि अगर ख़रीदार और बेचने वाला सच बोलें और कोई कमी न छिपाएँ, तो उनके सौदे में बरकत होती है, और अगर वे झूठ बोलें या कुछ छिपाएँ, तो उसकी बरकत चली जाती है।

क़ुरआन 5:90Sahih al-Bukhari 2079

मुसलमान कैसे कमाता है, यह भी मायने रखता है। पैगंबर (ﷺ) ने बताया कि अल्लाह (﷾) पाक है और केवल पाक चीज़ ही क़बूल करता है।

Sahih Muslim 1015

रोज़ की ज़िंदगी

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