संक्षिप्त उत्तर

विश्राम का दिन कलीसिया और एक रोमी सम्राट ने बदला, परमेश्वर या यीशु ने नहीं। सब्त की आज्ञा सातवें दिन, शनिवार, का नाम लेती है। व्यवस्था सब्त को सदा की वाचा कहती है, और यीशु ने उसका पालन किया। यीशु का कोई कथन दिन को रविवार पर नहीं ले जाता। ईसाई रविवार को इसलिए मिलने लगे कि वे मानते हैं कि यीशु उसी दिन जी उठे। लगभग 155 तक ईसाई लेखक जस्टिन शहीद ने कहा कि वे “उस दिन इकट्ठा होते हैं जिसे रविवार, यानी सूर्य का दिन, कहा जाता है”। 321 में सम्राट कॉन्स्टेंटाइन ने क़ानून द्वारा “सूर्य के पूज्य दिन” को विश्राम का दिन बना दिया। बाद में कलीसिया की एक परिषद ने ईसाइयों से कहा कि सब्त के दिन काम करें। ख़ुद कैथोलिक चर्च सिखाता है कि रविवार उसकी जगह लेता है। क़ुरआन कहता है कि सब्त यहूदियों पर लागू किया गया था। पैगंबर (ﷺ) ने कहा कि ईश्वर (﷾) ने मुसलमानों को शुक्रवार की राह दिखाई।

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