संक्षिप्त उत्तर

हाँ। पहली शताब्दी के ईसाई प्रचारक पौलुस ने ऐसी बातों का प्रचार किया जो यीशु ने नहीं सिखाईं। पौलुस यीशु की सेवकाई के दौरान उनसे कभी नहीं मिले। वह अपने प्रचार किए संदेश को “मेरे सुसमाचार” कहते थे। जब एक व्यक्ति ने यीशु से पूछा कि अनन्त जीवन कैसे पाए, तो यीशु ने उससे आज्ञाओं को मानने को कहा। पौलुस ने लिखा कि व्यवस्था के कामों से कोई धर्मी नहीं ठहरता, यानी परमेश्वर के साथ सही नहीं होता। यीशु का ख़तना हुआ था, जैसा इब्राहीम के साथ परमेश्वर की वाचा माँगती थी। पौलुस ने गलातिया के विश्वासियों से कहा कि यदि उनका ख़तना हुआ, तो मसीह से उन्हें कुछ लाभ न होगा। ईसाइयों की यह शिक्षा कि यीशु की मृत्यु पापों का दाम चुकाती है, पौलुस के पत्रों में रखी गई है, अनन्त जीवन के बारे में यीशु के अपने जवाब में नहीं। पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) वही वापस लाए जो ईसा ने सिखाया था: एक ईश्वर (﷾), और उसकी आज्ञाओं का पालन।

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