संक्षिप्त उत्तर

ऐसी कसौटियों से जिन्हें कोई भी किसी भी किताब पर लगा सकता है। ईश्वर (﷾) की ओर से आई किताब कहेगी कि वह ईश्वर (﷾) की ओर से है। वह ऐसे ईश्वर (﷾) का वर्णन करेगी जो एक, शाश्वत और अपरिवर्तनशील है, जैसा स्वयं सृष्टि दिखाती है। वह अपना खंडन नहीं करेगी और इतिहास में ग़लती नहीं करेगी। उसकी भविष्यवाणियाँ सच होंगी। उसमें ईश्वर (﷾) की ओर से एक ऐसा चिह्न होगा जिसकी आज भी जाँच की जा सके। और वह हम तक ऐसे ईमानदार लोगों के ज़रिए पहुँचेगी जिनके नाम हम बता सकें। क़ुरआन इनमें से एक कसौटी स्वयं अपने लिए रखता है: अगर वह ईश्वर (﷾) के सिवा किसी और की ओर से होता, तो लोग उसमें बहुत-से अंतर्विरोध पाते। पैगंबर (ﷺ) को उनके दुश्मन भी सच्चा मानते थे। इस्लाम का उत्तर है कि क़ुरआन इन कसौटियों पर खरा उतरता है जहाँ बाइबिल विफल होती है।

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