संक्षिप्त उत्तर

ईसाई कभी इस पर सहमत नहीं हुए कि परमेश्वर ने किन पुस्तकों को प्रेरणा दी। प्रोटेस्टेंट पुराने नियम में 39 पुस्तकें हैं। कैथोलिक में 46 हैं, और इथियोपियाई ऑर्थोडॉक्स बाइबिल में और भी ज़्यादा। 1546 में कैथोलिक ट्रेंट की परिषद ने प्रज्ञा और एक्लेसियास्टिकस जैसी पुस्तकों को पवित्र शास्त्र घोषित किया। 1870 में कैथोलिक चर्च ने उन्हें स्वीकार न करने वाले हर व्यक्ति को शाप दिया। 1646 में प्रोटेस्टेंट वेस्टमिंस्टर स्वीकारोक्ति ने कहा कि यही पुस्तकें बिलकुल भी ईश्वरीय प्रेरणा से नहीं हैं। फिर भी 1611 की पहली किंग जेम्स बाइबिल ने उन्हें दोनों नियमों के बीच छापा। इब्रानियों और प्रकाशितवाक्य जैसी पुस्तकों पर सदियों तक विवाद रहा। नए नियम की ठीक 27 पुस्तकों की पहली बची हुई सूची 367 की है। इसलिए किसी पद से तर्क करने से पहले एक ईसाई को पहले यह चुनना पड़ता है कि वह कौन-सी बाइबिल मानता है। क़ुरआन की दुनिया की हर प्रति में वही 114 सूरहें हैं।

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