संक्षिप्त उत्तर

हाँ। बाइबिल के अपने नबी कहते हैं कि परमेश्वर का वचन उन्हीं लोगों ने बदला जिनके पास वह रखा गया था। यिर्मयाह ने उन लोगों से, जो घमंड करते थे कि यहोवा की व्यवस्था उनके पास है, कहा कि शास्त्रियों की झूठी क़लम ने उसे झूठ बना दिया है। उसने यह भी कहा कि उन्होंने जीवित परमेश्वर के वचन बिगाड़ दिए हैं। मूसा ने चेतावनी दी कि उनकी मृत्यु के बाद लोग बिलकुल बिगड़ जाएँगे। उन्होंने पुस्तक को सन्दूक के पास उनके विरुद्ध साक्षी के रूप में रखवाया। सदियों बाद महायाजक को मन्दिर में व्यवस्था की पुस्तक मिली, और राजा उसे सुनकर स्तब्ध रह गया। व्यवस्थाविवरण का आख़िरी अध्याय स्वयं मूसा की मृत्यु और उनके दफ़न का वर्णन करता है। आधुनिक बाइबिलें अब पूरे-पूरे पदों को चिह्नित करती हैं जो सबसे पुरानी प्रतियों में नहीं हैं। इसलिए जब मुसलमान कहते हैं कि पाठ बदला गया, तो वे वही दोहराते हैं जो बाइबिल ने पहले कहा, और क़ुरआन इसकी पुष्टि करता है।

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