संक्षिप्त उत्तर

क़ुरआन ने एक पुरानी अरब रीति को ख़त्म करने के लिए इस विवाह का आदेश दिया। ज़ैनब बिन्त जहश पैगंबर (ﷺ) की अपनी फुफेरी बहन थीं। वे उन्हें उनके पूरे जीवन से जानते थे। उन्होंने ख़ुद ज़ैद से, जो उनके आज़ाद किए हुए ग़ुलाम और मुँह बोले बेटे थे, उनका विवाह कराया था। विवाह नहीं चला, और ज़ैद ने उन्हें तलाक़ दे दी। अरब में मुँह बोला बेटा सगे बेटे जैसा माना जाता था, इसलिए कोई आदमी अपने मुँह बोले बेटे की पूर्व पत्नी से विवाह नहीं कर सकता था। क़ुरआन ने उस रीति को ख़त्म किया। उसने पैगंबर (ﷺ) से ज़ैनब से विवाह करने को कहा, ताकि ईमान वालों को फिर कभी वह कठिनाई न हो। उन्हें डर था कि लोग क्या कहेंगे। आयत तो लोगों से डरने के लिए उन्हें टोकती भी है। उनकी पत्नी आयशा ने कहा कि अगर उन्होंने कभी कोई आयत छिपाई होती, तो वह यही होती। इसलिए इस्लाम सिखाता है कि यह विवाह ईश्वर (﷾) का आदेश था, और उन्होंने उसे वैसे ही पहुँचाया जैसे पाया।

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