संक्षिप्त उत्तर

नहीं। विजयें हुईं, लेकिन विजय धर्मांतरण नहीं है। क़ुरआन साफ़ कहता है कि धर्म के मामले में कोई ज़ोर-ज़बरदस्ती नहीं। वह ख़ुद पैगंबर (ﷺ) से भी पूछता है कि क्या वे लोगों को ईमान लाने पर बाध्य करेंगे। इतिहास इससे सहमत है। मुसलमानों ने लगभग आठ सौ वर्ष स्पेन पर शासन किया, और उस समय के अधिकांश भाग में वहाँ के ईसाई और यहूदी ईसाई और यहूदी ही रहे। उस्मानियों ने लगभग चार शताब्दियों तक यूनान और सर्बिया पर शासन किया, और दोनों आज भी ईसाई हैं। मुसलमान बादशाहों ने छह सौ वर्ष दिल्ली से शासन किया, फिर भी उपमहाद्वीप के अधिकतर लोग हिंदू ही रहे। सबसे बड़ा मुसलमान देश इंडोनेशिया कभी किसी विदेशी मुस्लिम सेना ने नहीं जीता। व्यापारी इस्लाम को वहाँ लाए। अमेरिका महाद्वीपों में विजय के बाद पूरी की पूरी क़ौमों को ईसाई बनाया गया, और यह मुसलमानों ने नहीं किया। इस्लाम का उत्तर क़ुरआन का अपना नियम है: धर्म में कोई ज़ोर-ज़बरदस्ती नहीं।

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