संक्षिप्त उत्तर

कोई सूची सर्वमान्य नहीं। बौद्ध धर्म की दो बड़ी शाखाएँ अलग-अलग ग्रंथों को बुद्ध का वचन मानती हैं। थेरवाद पालि ग्रंथ रखता है, और महायान सद्धर्मपुण्डरीक (लोटस सूत्र) जैसे सूत्र जोड़ता है। ये ग्रंथ इस पर असहमत हैं कि बुद्ध ने क्या सिखाया। पालि ग्रंथों में वे उरुवेला में, इसी जीवन में, बोधि पाते हैं। लोटस सूत्र कहता है कि “सच यह है” कि वे अनगिनत युगों पहले जागे। पालि ग्रंथों में वे व्यक्ति के हर भाग के बारे में कहते हैं, “यह मेरा आत्मा नहीं है”। एक महायान सूत्र हर प्राणी में बुद्ध-स्वभाव को आत्मा कहता है। इसलिए पाठक को चुनना पड़ता है कि किस ‘बुद्ध के वचन’ पर भरोसा करे। मुसलमानों के पास एक क़ुरआन है। हर मुसलमान 114 सूरतों वाली वही किताब रखता है। किसी मुस्लिम समूह के पास कोई प्रतिद्वंद्वी क़ुरआन नहीं, और मुसलमान कोई बाद की किताब नहीं मानते जो उसे सुधारे। क़ुरआन आपसे उसे परखने को कहता है।

पूरी व्याख्या पढ़ें

अपने सहेजे गए पृष्ठ देखें