संक्षिप्त उत्तर

पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) का 632 में देहांत हुआ और उन्हें मदीना में दफ़नाया गया, जहाँ आज उनकी क़ब्र है। उनकी आत्मा मौत और क़यामत के दिन के बीच के जीवन में है, जिसे क़ुरआन बरज़ख़ कहता है। ईसा की मृत्यु नहीं हुई। मुसलमान मानते हैं कि ईश्वर (﷾) ने उन्हें जीवित अपनी ओर उठा लिया, और वे अब आसमान में हैं। मेराज की रात पैगंबर (ﷺ) दूसरे आसमान में ईसा से मिले। ईसा क़यामत के दिन से पहले लौटेंगे, धरती पर रहेंगे, और फिर हर इनसान की तरह मरेंगे। क़ुरआन कहता है: “मुह़म्मद केवल एक रसूल हैं”, और यह कि वे भी मरेंगे। पैगंबर (ﷺ) ने कहा कि धरती नबियों के शरीरों को नहीं खाती। दोनों ईश्वर (﷾) के सम्मानित बंदे हैं। दोनों में से कोई ईश्वर (﷾) नहीं है, और उपासना केवल ईश्वर (﷾) की होती है।

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