संक्षिप्त उत्तर

ईसाई कहानी उस पर खरी नहीं उतरती। मत्ती में यीशु ने चिह्न माँगने वालों से केवल एक ही चिह्न का वादा किया: योना का चिह्न। उन्होंने कहा कि जैसे योना मछली में था, वैसे ही मनुष्य का पुत्र पृथ्वी के भीतर रहेगा। लेकिन योना पूरे समय जीवित थे। उन्होंने मछली के अंदर से प्रार्थना की और जीवित बाहर आए। ईसाई मानते हैं कि यीशु क़ब्र में मृत पड़े रहे, जो योना से भिन्न है। ईसाई दिनों की गिनती को अलग-अलग तरीक़ों से समझाते हैं। लेकिन दिन चाहे जैसे गिने जाएँ, योना जीवित थे और ईसाई मानते हैं कि यीशु मृत थे। यीशु के दिए चिह्न की कसौटी पर ईसाई कहानी विफल हो जाती है। क़ुरआन कहता है कि ईसा न तो क़त्ल किए गए और न सूली पर चढ़ाए गए, और अल्लाह (﷾) ने उन्हें अपनी ओर उठा लिया।

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