संक्षिप्त उत्तर

यीशु ने कहा कि पहली आज्ञा है “हे इस्राएल सुन; प्रभु हमारा परमेश्वर एक ही प्रभु है”। एक शास्त्री ने उनसे पूछा था कि कौन-सी आज्ञा पहली है। यीशु ने मूसा का पंथ-वचन दिया, फिर परमेश्वर से अपने सारे मन से प्रेम करने की आज्ञा। उन्होंने किसी पुत्र या पवित्र आत्मा के बारे में कुछ नहीं कहा। शास्त्री ने इसे दोहराया: परमेश्वर एक ही है, और उसे छोड़ और कोई नहीं। यीशु ने उससे कहा कि वह परमेश्वर के राज्य से दूर नहीं। यदि परमेश्वर तीन व्यक्ति होता, तो यह कहने का यही क्षण था। एक और जगह यीशु ने परमेश्वर को “अपने परमेश्वर और तुम्हारे परमेश्वर” कहा। इस्लाम यही पंथ-वचन सिखाता है: अल्लाह (﷾) एक है, और उसके जैसा कोई नहीं।

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