संक्षिप्त उत्तर

इस्लाम सिखाता है कि कोई भी इंसान ईश्वरीय नहीं है। क़ुरआन कहता है कि आकाशों और धरती में हर कोई ईश्वर (﷾) के पास दास बनकर आता है। उसने ख़ुद पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) से कहलवाया: “मैं तो तुम्हारे जैसा ही एक मनुष्य हूँ”। कोई नबी लोगों से अपनी इबादत करने को नहीं कह सकता। जापानी राज्य ने कभी इसके उलट सिखाया। उसके 1889 के संविधान की एक टीका ने सम्राट के बारे में कहा कि वह “स्वर्ग से उतरा है, दिव्य और पवित्र है”। 1 जनवरी 1946 को एक राजाज्ञा, यानी सम्राट के नाम से एक औपचारिक घोषणा, ने कुछ नया कहा। उसने कहा कि सम्राट और प्रजा के बीच के बंधन “इस झूठी धारणा पर आधारित नहीं हैं कि सम्राट दिव्य है”। इस्लाम की शिक्षा किसी राजाज्ञा पर नहीं टिकी। वह हर इंसान पर लागू होती है, राजाओं और नबियों पर एक जैसी। सम्मान लोगों का हक़ है, और इबादत केवल ईश्वर (﷾) का।

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