संक्षिप्त उत्तर

अगर आप कहते हैं कि आपका कोई धर्म नहीं, तो इस्लाम आपसे किसी संगठन में शामिल होने को नहीं कहता। वह जीने का एक पूरा तरीका (दीन) है: विश्वास, इबादत, परिवार और चरित्र, सब एक साथ। आप शायद पहले से खाने से पहले इतादाकिमासु कहते हों, शिंतो मंदिर पर हाथ धोते हों और अपने माता-पिता का आदर करते हों। इस्लाम इनमें से हर रिवाज का जवाब देता है। मुसलमान खाना बिस्मिल्लाह, यानी ‘अल्लाह के नाम से’, से शुरू करते हैं। वे नमाज़ से पहले धोते हैं। उन्हें अपने माता-पिता के साथ अच्छा व्यवहार करने का आदेश है। इन रिवाजों के नीचे वे प्रश्न हैं जो हर कोई पूछता है। हमें किसने बनाया, हमें कौन सुनता है, और मृत्यु के बाद क्या आता है? क़ुरआन पूछता है: “तो क्या तुमने समझ रखा था कि हमने तुम्हें उद्देश्यहीन पैदा किया है”? (23:115)। इस्लाम जो असली बदलाव माँगता है, वह है इबादत सिर्फ़ अल्लाह (﷾) की करना।

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