संक्षिप्त उत्तर

नहीं। वेस्सन्तर जातक बुद्ध के पिछले जन्मों की एक कहानी है, जो एक हज़ार पदों में कही गई है। इसमें राजकुमार वेस्सन्तर अपने दो छोटे बच्चे एक बूढ़े ब्राह्मण, जूजक, को दे देते हैं। दान का जल उँडेलते हुए वे पुकार उठते हैं कि सर्वज्ञता उन्हें अपने पुत्र से लाख गुना अधिक प्रिय है। कहानी कहती है कि इस दान पर धरती काँप उठी। जूजक बच्चों के हाथ बाँधता है और उनके पिता की आँखों के सामने उन्हें तब तक पीटता है जब तक ख़ून न बहने लगे। वेस्सन्तर अपने स्नेह को शांत करके अपना शोक थाम लेते हैं। अंत में बुद्ध कहते हैं कि वेस्सन्तर वे ख़ुद थे, और उनका अपना पुत्र राहुल वह लड़का था। इस्लाम इसे सद्गुण नहीं मानता। पैगंबर (ﷺ) ने ईमान वालों से कहा कि अपना दान उनसे शुरू करें जिनकी वे देखभाल करते हैं।

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