संक्षिप्त उत्तर

हाँ, अधिकतर विद्वान इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि तल्मूद यीशु के बारे में यह कहता है। तल्मूद की किताब गित्तिन (पृष्ठ 57a) में ओंकेलोस नाम का एक रोमी, जो यहूदी धर्म अपनाना चाहता था, तीन मरे हुए लोगों को बुलाता है। तीसरा ‘येशु’ है, जो नाम यीशु का एक हिब्रू रूप है। येशु कहता है कि उसका दंड खौलता मल है। तल्मूद कारण बताता है: जो कोई विद्वानों के वचनों का मज़ाक उड़ाता है, उसे इस तरह दंड दिया जाता है। हाथ से लिखी तीन मध्यकालीन पांडुलिपियाँ उसका नाम येशु बताती हैं। उनमें से एक उसे येशु हा-नोत्सरी, यानी ‘यीशु नासरी’, कहती है। पहले छपे संस्करण में ही नाम छोड़ दिया गया था, और सेंसर किए गए संस्करण “इस्राएल के पापी” पढ़ते हैं। क़ुरआन इसका उलटा कहता है। ईसा के बारे में वह कहता है: “वह दुनिया तथा आख़िरत में महान स्थान वाला और निकटवर्ती लोगों में से होगा” (3:45)।

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