संक्षिप्त उत्तर

हाँ। क़ुरआन कहता है कि ईश्वर (﷾) ने धरती को बिछौना बनाया, “और पर्वतों को मेखें”। मेख का ज़्यादातर हिस्सा ज़मीन में छिपा रहता है। 1800 वाली शताब्दी में भारत के सर्वेक्षक साहुल-रेखाओं का प्रयोग करते थे, यानी डोरी पर लटके वज़न जो ठीक नीचे की दिशा दिखाते हैं। 1855 में दिखाया गया कि हिमालय उन्हें जितना खींचना चाहिए था, उससे बहुत कम बग़ल की ओर खींचता था। वैज्ञानिकों ने इसका कारण निकाला। बड़ी पर्वतमालाओं के नीचे परत की गहरी जड़ें होती हैं, जो अक्सर चोटियों की ऊँचाई से कहीं ज़्यादा गहरी जाती हैं। अरब के रेगिस्तान में पैगंबर (ﷺ) पर उतरे क़ुरआन ने रोज़मर्रा का एक ऐसा चित्र चुना जो ठीक बैठता है। यह भूविज्ञान का पाठ नहीं है। इस्लाम सिखाता है कि यह उस हस्ती की ओर से एक निशानी है जिसने धरती बनाई।

पूरी व्याख्या पढ़ें

अपने सहेजे गए पृष्ठ देखें