संक्षिप्त उत्तर

क़ुरआन ईमान से ख़ाली लोगों की तुलना एक गहरे सागर के अँधेरे में फँसे व्यक्ति से करता है। वह ऐसी लहरों की बात करता है जिन्हें और लहरें ढाँपे हुए हैं, ऊपर बादल हैं, और अँधेरा परतों में है, एक के ऊपर एक। उस अँधेरे में आदमी अपना हाथ भी मुश्किल से देख पाता है। इस तस्वीर में कुछ भी ग़लत नहीं। समुद्र जितना गहरा होता है, रोशनी उतनी कम होती जाती है, और लगभग 200 मीटर से नीचे लगभग कोई रोशनी नहीं होती। सतह के बहुत नीचे भी अपनी छिपी लहरें होती हैं, जिन्हें बहुत से मुसलमान आयत की लहर के ऊपर लहर में देखते हैं। वैज्ञानिकों ने उनका सिद्धांत पहली बार उन्नीसवीं शताब्दी में तैयार किया। क़ुरआन पैगंबर (ﷺ) पर एक रेगिस्तानी शहर में उतरा। यह ज्ञात नहीं कि वे कभी समुद्र पर गए हों, और उस समय कोई गहराई में उतर नहीं सकता था। आयत ईमान के बारे में एक सीख देती है, और यह एक निशानी भी है।

पूरी व्याख्या पढ़ें

अपने सहेजे गए पृष्ठ देखें