संक्षिप्त उत्तर

क़ुरआन कहता है कि बादलों को धीरे-धीरे चलाया जाता है, आपस में मिलाया जाता है और तह-ब-तह ढेर कर दिया जाता है। उनके बीच से बारिश निकलती है, और आकाश में पर्वतों जैसे बादलों से ओले गिरते हैं, साथ में ऐसी बिजली जो आँखें चौंधिया दे। वह बादलों को भारी भी कहता है। इसका हर हिस्सा सच है। एक साधारण बादल में लगभग 500 टन पानी होता है, और वह इसलिए तैरता है कि उसकी बूँदें बहुत छोटी होती हैं। पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) एक रेगिस्तानी शहर में रहते थे और पढ़ नहीं सकते थे। उनके समय का विद्वान जगत तूफ़ानों को अरस्तू के इस सिद्धांत से समझाता था कि सूखी वाष्पें आग पकड़ लेती हैं। क़ुरआन उस सिद्धांत में से कुछ नहीं दोहराता। वह वही बताता है जो कोई भी तूफ़ान में देख सकता है, और यह कैसे काम करता है, इसका कोई सिद्धांत नहीं देता। क़ुरआन ऐसी चीज़ों को ईश्वर (﷾) की निशानियाँ कहता है।

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