संक्षिप्त उत्तर

क़ुरआन कहता है कि ईश्वर (﷾) ने मधुमक्खी को प्रेरित किया कि वह अपने घर बनाए और अपने पालनहार के रास्तों पर चले। वह कहता है कि मधुमक्खियों के पेटों से विभिन्न रंगों का एक पेय निकलता है, और उसमें आरोग्य है। हर बात सच है। सदियों तक विद्वान सिखाते रहे कि शहद आसमान से गिरता है और मधुमक्खियाँ केवल उसे इकट्ठा करती हैं। असल में मधुमक्खियाँ मकरंद लेती हैं और उसे अपने शरीर के भीतर बदलती हैं। शहद कई रंगों में आता है, लगभग रंगहीन से गहरे एम्बर तक। आज अस्पतालों में इसे घाव की पट्टी के रूप में प्रयोग किया जाता है। पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) पढ़ नहीं सकते थे, और क़ुरआन इस सबको सोच-विचार करने वालों के लिए एक निशानी कहता है।

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