संक्षिप्त उत्तर

हाँ, उनमें सबसे निचले में, यानी धरती के सबसे निकट वाले आकाश में। क़ुरआन 71:16 कहता है कि ईश्वर (﷾) ने “उनमें चाँद को प्रकाश बनाया”, यानी सात आकाशों में। आलोचक कहते हैं कि इससे चाँद आकाशों के बीच, तारों से परे, पहुँच जाता है। पर क़ुरआन सबसे निचले आकाश का तीन बार नाम लेता है, और हर बार ईश्वर (﷾) ने उसे दीपों या तारों से सजाया है। अरबी में किसी चीज़ को ‘उनमें’ कहा जा सकता है जब वह उनमें से एक में हो। 13वीं सदी के टीकाकार (क़ुरआन की व्याख्या करने वाले विद्वान) क़ुरतुबी इसे सबसे निचले आकाश में चाँद के रूप में पढ़ते हैं। आयत चाँद, सूरज या तारों की कोई दूरी, आकार या क्रम नहीं देती, इसलिए इसमें मापने लायक़ कुछ नहीं। वह चाँद को प्रकाश कहती है, और चाँद सचमुच रात को रोशन करता है। वह यह नहीं कहती कि वह रोशनी कहाँ से आती है। आयत का मक़सद चाँद से उसके रचयिता की ओर इशारा करना है।

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