संक्षिप्त उत्तर

नहीं। यह आयत न किसी शादी की अनुमति देती है, न कोई उम्र बताती है। यह तलाक़ के बाद इद्दत (प्रतीक्षा की अवधि) उन पत्नियों के लिए तय करती है जिनके पास गिनने के लिए कोई मासिक चक्र नहीं है। इसके अरबी शब्दों का अर्थ है “जिन्हें माहवारी नहीं आई”। उनमें ‘कम उम्र’ के लिए कोई शब्द नहीं है और ‘अभी तक’ के लिए भी कोई शब्द नहीं। जिन औरतों पर यह लागू होती है उनमें वे वयस्क औरतें भी शामिल हैं जिनकी माहवारी कभी शुरू ही नहीं हुई, जिसे डॉक्टर प्राथमिक एमेनोरिया कहते हैं। इस्लामी क़ानून के चारों मुख्य मसलकों के फ़क़ीहों ने यह आयत ऐसी औरतों पर लागू की। अधिकांश शास्त्रीय टीकाकारों ने कम उम्र लड़कियों को भी गिना। इद्दत केवल उस शादी के बाद होती है जिसमें संभोग हो चुका हो, लेकिन आयत केवल यह बताती है कि पत्नी कितनी देर प्रतीक्षा करे, यह नहीं कि संभोग की अनुमति कब है। शास्त्रीय इस्लामी क़ानून ने संभोग को तब तक मना किया जब तक पत्नी उसे बिना नुक़सान के सह न सके। और पैगंबर (ﷺ) ने वह शादी रद्द कर दी जो एक पिता ने अपनी वयस्क बेटी पर थोपी थी। आज हर देश का क़ानून शादी की उम्र तय करता है, और मुसलमान जहाँ भी रहें क़ानून का पालन करते हैं, क्योंकि क़ुरआन उन्हें अपने समझौतों का पाबंद बनाता है (17:34)।

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