संक्षिप्त उत्तर

क़ुरआन का चुनाव ऐतिहासिक रूप से सही है। ‘फ़िरौन’ शब्द मिस्री ‘पर-आ’ से आया है, यानी “बड़ा घर”। एक हज़ार से ज़्यादा वर्षों तक इसका अर्थ महल था, आदमी नहीं। यह ख़ुद राजा का नाम केवल नए राज्य काल में बना, जो लगभग 1550 ई.पू. में शुरू हुआ। क़ुरआन यूसुफ़ की कहानी के शासक को ‘राजा’ कहता है और ‘फ़िरौन’ उस शासक के लिए रखता है जिसका सामना मूसा ने किया। बाइबिल दोनों आदमियों को बार-बार फ़िरौन कहती है, और इब्राहीम के शासक को भी। पैगंबर (ﷺ) ने इब्राहीम के शासक को राजा या अत्याचारी कहा, फ़िरौन नहीं। 1822 में चित्रलिपि (मिस्री चित्र-लेखन) पढ़े जाने तक कोई इसे जाँच नहीं सकता था। बाइबिल से नक़ल करने वाला आदमी फ़िरौन लिखता। तो यहाँ क़ुरआन ने बाइबिल से नक़ल नहीं की, जो इस्लाम के इस जवाब से मेल खाता है कि वह ईश्वर (﷾) की ओर से है।

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