संक्षिप्त उत्तर

नहीं। मुसलमान उस तौरात पर ईमान रखते हैं जो ईश्वर (﷾) ने मूसा को दी, और उस इंजील (वह सुसमाचार जिसका ईसा ने प्रचार किया) पर जो ईश्वर (﷾) ने ईसा को दी। आज इन नामों से छपी किताबें वे प्रकाशन नहीं हैं। नए नियम के चार सुसमाचार ईसा के बारे में विवरण हैं, जिन्हें ऐसे लोगों ने लिखा जो अपना नाम नहीं बताते। छपी हुई तोराह मूसा की अपनी मृत्यु और दफ़न का वर्णन करती है। नए नियम की यूनानी प्रतियों में लाखों अंतर हैं। अधिकतर छोटे हैं, लेकिन कुछ अर्थ बदल देते हैं। बाइबिल की पुस्तकें ख़ुद इब्रानी में भी एक-दूसरे का खंडन करती हैं। यशायाह कहता है कि परमेश्वर का वचन सदैव अटल रहेगा। जो किताब ग़लती करती है, वह वह वचन नहीं हो सकती, हालाँकि पुराने प्रकाशन का बहुत कुछ अब भी उसमें झलकता है। क़ुरआन उसमें जो सच है उसकी पुष्टि करने और उसकी संरक्षक बनने आया।

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