संक्षिप्त उत्तर

हाँ। बाइबिल के कई अंश क़ुरआन पर ठीक बैठते हैं। व्यवस्थाविवरण में परमेश्वर मूसा जैसे एक नबी का वादा करता है और कहता है कि वह अपने वचन उसके मुँह में डालेगा। क़ुरआन ठीक यही है: उसमें ईश्वर (﷾) ‘मैं’ कहकर बोलता है, और पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) ने उसे शब्दशः दोहराया। यीशु ने आने वाले “सत्य का आत्मा” की बात की, जो अपनी ओर से न कहेगा, केवल वही कहेगा जो सुनेगा। क़ुरआन पैगंबर (ﷺ) के बारे में भी यही कहता है: वे अपनी इच्छा से नहीं बोलते, केवल वही जो उन पर वह्य किया जाता है। इसीलिए मुसलमान मानते हैं कि बाइबिल ख़ुद क़ुरआन की ओर संकेत करती है।

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