संक्षिप्त उत्तर

नहीं। बाइबिल ख़ुद कहती है कि परमेश्वर मनुष्य नहीं है और बदलता नहीं। होशे में परमेश्वर कहता है: “मैं मनुष्य नहीं, परमेश्वर हूँ”। मलाकी में वह कहता है: “मैं यहोवा हूँ, मैं बदलता नहीं”। एक व्यक्ति में एक ही समय पर विपरीत गुण नहीं हो सकते। परमेश्वर मर नहीं सकता, फिर भी ईसाई कहते हैं कि यीशु मरे। परमेश्वर की परीक्षा नहीं हो सकती, फिर भी शैतान ने यीशु की परीक्षा ली। परमेश्वर सब कुछ जानता है, फिर भी यीशु बुद्धि में बढ़ते गए और अंत की घड़ी नहीं जानते थे। परमेश्वर किसी पर निर्भर नहीं, फिर भी यीशु ने कहा कि उनका उपदेश उनका अपना नहीं। परमेश्वर को किसी ने नहीं देखा, फिर भी हज़ारों ने यीशु को देखा। इसे रहस्य कह देने से विरोधाभास मिट नहीं जाता। इस्लाम का जवाब इनमें से हर पद से मेल खाता है: ईसा एक मनुष्य और ईश्वर (﷾) के एक रसूल थे।

पूरी व्याख्या पढ़ें

अपने सहेजे गए पृष्ठ देखें