संक्षिप्त उत्तर

इस्लाम एक सृष्टिकर्ता में आपके विश्वास को बनाए रखता है और उसमें वह जोड़ता है जो ईश्वर (﷾) ने ख़ुद निर्धारित किया। आप पहले से एक अजन्मे सृष्टिकर्ता में विश्वास करते हैं, सब लोगों का एक-सा सम्मान करते हैं, और रोज़ ईश्वर (﷾) को याद करते हैं। इस्लाम आपसे इनमें से कुछ भी छोड़ने को नहीं कहता। वह उपासना जोड़ता है जैसी ईश्वर (﷾) ने सिखाई: नमाज़, रोज़ा, ज़कात और हज। वह वह्य से आया क़ानून, एक ही जीवन, और एक ऐसा दिन जोड़ता है जब आपका अपना कर्मपत्र पढ़ा जाएगा। वह जड़ में एक बदलाव ज़रूर माँगता है: अपना मार्गदर्शन क़ुरआन और अंतिम पैगंबर (ﷺ) से लेना। इसलिए एक ही प्रश्न है कि क्या क़ुरआन ईश्वर (﷾) का अंतिम वचन है, और वह आपको उसे परखने का निमंत्रण देता है। मुसलमान पुरुष को रोज़मर्रा के जीवन में अपने सिर के बाल कटवाने की ज़रूरत नहीं, और इस्लाम पुरुषों से कहता है कि दाढ़ी को बढ़ने दें। इस्लाम जीवन का एक पूरा तरीक़ा है, आस्था से इबादत और चरित्र तक।

पूरी व्याख्या पढ़ें

अपने सहेजे गए पृष्ठ देखें