संक्षिप्त उत्तर

वे कसौटियाँ अपनाइए जो बाइबिल ख़ुद देती है। पहली कसौटी मूसा ने दी। अगर कोई नबी यहोवा के नाम से बोले और उसकी बात पूरी न हो, तो वह बात यहोवा ने नहीं कही। यीशु ने जोड़ा कि झूठे भविष्यद्वक्ताओं को तुम उनके फलों से पहचानोगे। उन्होंने चेतावनी दी कि झूठे मसीह बड़े चिह्न दिखाएँगे, इसलिए अकेले अद्भुत काम कुछ साबित नहीं करते। उन्होंने यह भी कहा कि जो कोई कहे कि मसीह यहाँ है या वहाँ है, उसकी प्रतीति न करना। यीशु ने अपने चेलों से कहा कि जो उन्होंने सेंतमेंत पाया है, वह सेंतमेंत दें। क़ुरआन मेल खाते चिह्न देता है। सच्चा रसूल कोई बदला नहीं माँगता, और उससे बढ़कर अत्याचारी कोई नहीं जो ऐसी वह्य का दावा करे जो उसे कभी मिली ही नहीं। पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) इन चिह्नों पर खरे उतरते हैं। उन्होंने संदेश के लिए कोई मेहनताना नहीं माँगा, और क़ुरआन का यह वादा सच हुआ कि हारे हुए रूमी कुछ ही वर्षों में जीत जाएँगे।

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