संक्षिप्त उत्तर

क़ुरआन ईश्वर (﷾) का वचन है, जो ठीक वैसे ही पढ़ा जाता है जैसे फ़रिश्ता जिब्रील उसे लाए। हदीसें पैगंबर (ﷺ) के शब्द और काम हैं, जिन्हें उन लोगों ने बताया जिन्होंने उन्हें सुना और देखा। दोनों की आवाज़ अलग है। हदीसें एक मनुष्य के बोलने जैसी लगती हैं: सीधी, व्यावहारिक, और सामने के प्रश्न के अनुसार। क़ुरआन की अपनी लय और तुक है, और वह पैगंबर (ﷺ) से बाहर से बात करता है। वह उन्हें बताता है कि क्या कहें, और कभी-कभी उन्हें सुधारता है। एक तीसरी तरह की वाणी, हदीस क़ुदसी (पवित्र हदीस), ईश्वर (﷾) का अर्थ पैगंबर (ﷺ) के अपने शब्दों में देती है। हदीस क़ुदसी को कभी क़ुरआन में नहीं रखा गया। और जब उनकी पत्नी आयशा पर झूठा आरोप लगा, तो उन्होंने एक महीने तक वह्य की प्रतीक्षा की। जब तक ईश्वर (﷾) ने नहीं भेजी, कोई आयत नहीं आई। इसलिए इस्लाम सिखाता है कि क़ुरआन ईश्वर (﷾) का वचन है, और किसी और का नहीं।

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