संक्षिप्त उत्तर

किसी वैज्ञानिक सिद्धांत के रूप में नहीं। पर क़ुरआन तीन बातें कहता है जो उससे मेल खाती हैं जो खगोलशास्त्री आज जानते हैं। वह कहता है कि आकाश और धरती कभी मिले हुए थे, और फिर ईश्वर (﷾) ने उन्हें अलग किया। वह कहता है कि आकाश कभी धुआँ था। और वह कहता है कि ईश्वर (﷾) आकाश को विशाल बनाता है। 1929 में खगोलशास्त्री एडविन हबल ने पाया कि दूर की आकाशगंगाएँ हमसे दूर जा रही हैं, जो जितनी दूर है उतनी ही तेज़ी से। 1964 में दो रेडियो खगोलशास्त्रियों ने ब्रह्मांड की गर्म शुरुआत की मंद बची हुई चमक पकड़ी। क़ुरआन भौतिकी की किताब नहीं है। पर ये आयतें पैगंबर (ﷺ) पर तेरह शताब्दियाँ पहले उतरीं। उनके आसपास जाने जाने वाले सृष्टि के वर्णन में सूर्य के होने से पहले ही दिन और रात, और पौधे भी, थे। क़ुरआन इनमें से कोई ग़लती नहीं दोहराता। इस्लाम इसे एक निशानी कहता है।

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