संक्षिप्त उत्तर

बाइबिल दोनों बातें कहती है। 1 शमूएल 15 में परमेश्वर कहता है कि वह शाऊल को राजा बनाकर पछताता है (उसे खेद है)। कुछ पद बाद शमूएल कहते हैं कि परमेश्वर “मनुष्य नहीं है, कि पछताए”। फिर अध्याय यह कहकर समाप्त होता है कि यहोवा शाऊल को राजा बनाकर पछताता था। उत्पत्ति 6 में परमेश्वर को इस बात का खेद है कि उसने मनुष्य को बनाया ही, और वह मन में अति खेदित होता है। फिर भी गिनती 23:19 कहता है कि परमेश्वर नहीं पछताता। क़ुरआन मनुष्य की कहानी दूसरी तरह बताता है। जब ईश्वर (﷾) ने कहा कि वह धरती पर मनुष्य को बसाएगा, तो फ़रिश्तों को रक्तपात का डर हुआ। ईश्वर (﷾) ने उत्तर दिया कि वह जानता है जो वे नहीं जानते। वह मनुष्य को बनाने से पहले सब कुछ जानता था, इसलिए उसे बनाने पर उसे कभी खेद नहीं होता।

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