संक्षिप्त उत्तर

हाँ, उसके अपने विवरण के अनुसार। ईसाई ठीक ही मानव बलि की निंदा करते हैं, जैसे सदियों पहले इंका और माया लोगों की बच्चों की बलि। आज जो पिता अपने बेटे की बलि चढ़ाए, उस पर हत्या का मुक़दमा चलेगा। फिर भी ईसाई मानते हैं कि परमेश्वर ने अपने ही पुत्र को दूसरों के पापों के लिए भेंट के रूप में मरने दिया। पौलुस कहते हैं कि मसीह ने अपने आप को “परमेश्वर के आगे भेंट और बलिदान” कर दिया। यह एक अजीब विरोधाभास है। तोराह बेटे-बेटियों को जलाने को घृणित काम कहती है। ईश्वर (﷾) ने इब्राहीम को उनके बेटे को कोई हानि पहुँचाने से पहले रोक दिया। नबी मीका पूछते हैं कि क्या ईश्वर (﷾) किसी मनुष्य के पाप के बदले उसका पहिलौठा चाहता है। उनका उत्तर है: न्याय से काम करो, दया से प्रीति रखो और ईश्वर (﷾) के साथ नम्रता से चलो। इस्लाम में कोई किसी दूसरे के पाप के लिए नहीं मरता। क़ुरआन कहता है: “अल्लाह को उनके मांस और उनके रक्त हरगिज़ नहीं पहुँचेंगे, परंतु उसे तुम्हारा तक़वा पहुँचेगा”।

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