संक्षिप्त उत्तर

उनका धर्मग्रंथ ऐसा कभी नहीं कहता। महापरिनिब्बान सुत्त में, जो उनकी मृत्यु का वर्णन है, उन्होंने उन्हें भोजन कराने वाले लोहार चुंद से कहा कि एक व्यंजन का बचा हुआ हिस्सा गाड़ दो। उन्होंने कहा कि संसार में बुद्ध के सिवा कोई उसे ठीक से पचा नहीं सकता। ठीक अगली पंक्ति कहती है कि उसे खाने के बाद वे ख़ूनी पेचिश से गंभीर रूप से बीमार पड़ गए, मृत्यु के निकट। इसके कुछ ही समय बाद उनकी मृत्यु हो गई। वही सुत्त कहता है कि तीन महीने पहले उन्होंने अपने सहायक आनंद को इशारा किया था कि वे और जी सकते हैं। आनंद ने उनसे ऐसा करने की विनती नहीं की, और उन्होंने अपनी जीवन-शक्ति त्याग दी। बाद में उन्होंने आनंद से कहा कि दोष केवल उसी का है। तो वही धर्मग्रंथ कहता है कि केवल वे उस व्यंजन को पचा सकते थे, और फिर यह कि उसे खाने के बाद वे गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। क़ुरआन पैगंबर (ﷺ) से कहलवाता है कि अगर वे ग़ैब जानते होते, तो उन्हें कोई कष्ट नहीं पहुँचता।

पूरी व्याख्या पढ़ें

अपने सहेजे गए पृष्ठ देखें