संक्षिप्त उत्तर

नहीं। यीशु ने कहा कि वे मूसा की व्यवस्था को लोप करने नहीं, बल्कि पूरा करने आए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक आकाश और पृथ्वी न टल जाएँ, एक मात्रा (इब्रानी लिपि का सबसे छोटा अक्षर) भी नहीं टलेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि जो कोई छोटी से छोटी आज्ञा को तोड़े, और दूसरों को भी वैसा ही सिखाए, वह स्वर्ग के राज्य में सबसे छोटा कहलाएगा। उनका ख़तना हुआ था, और सब्त के दिन आराधनालय में उपासना करना उनकी रीति थी। अनन्त जीवन के बारे में पूछने वाले एक व्यक्ति से उन्होंने आज्ञाओं को मानने को कहा। वर्षों बाद भी उनके चेले इस पर बहस कर रहे थे कि नए विश्वासियों को व्यवस्था माननी चाहिए या नहीं। पहली शताब्दी के एक ईसाई प्रचारक पौलुस ने ही ईसाइयों से कहा कि “तुम व्यवस्था के अधीन नहीं”। इस्लाम का उत्तर: क़ुरआन कहता है कि ईसा व्यवस्था की पुष्टि करने आए थे, और कुछ ऐसी चीज़ें हलाल करने जो हराम की गई थीं। अपनी व्यवस्था को केवल ईश्वर (﷾) बदलता है, किसी पैगंबर के द्वारा।

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