संक्षिप्त उत्तर

नहीं। क़ुरआन कहता है कि ईसा के शत्रुओं ने न उन्हें क़त्ल किया और न सूली पर चढ़ाया, इसलिए कोई शाप उन्हें कभी छू नहीं सका। किंग जेम्स बाइबिल में मूसा की व्यवस्था पेड़ पर लटकाए गए व्यक्ति को परमेश्वर की ओर से शापित कहती है। पहली शताब्दी के ईसाई प्रचारक पौलुस उस पद को उद्धृत करते हैं और उसे स्वीकार करते हैं। वे लिखते हैं कि मसीह हमारे लिए शापित बना। इसलिए ईसाई कहानी को ज़रूरत है कि परमेश्वर की अपनी व्यवस्था उसके मसीह को शाप दे। क़ुरआन ईसा को इसके उलट स्थान देता है। वह कहता है कि वे इस दुनिया और आख़िरत में सम्मानित हैं, और ईश्वर (﷾) के सबसे निकट लोगों में से हैं। ईश्वर (﷾) ने उन्हें अपनी ओर उठा लिया। यहूदियों ने शुरू से ही क्रूस पर चढ़ाए गए मसीहा पर आपत्ति की, और पौलुस ने क्रूस को उनके लिए ठोकर का कारण कहा। इस्लाम का उत्तर यह है कि शाप क्रूस की ईसाई कहानी का हिस्सा है। क़ुरआन के ईसा कभी उसके अधीन नहीं थे।

पूरी व्याख्या पढ़ें

अपने सहेजे गए पृष्ठ देखें