संक्षिप्त उत्तर

नहीं, सबूत दूसरी ओर इशारा करते हैं। पहला, विज्ञान: ब्रह्मांड फैल रहा है। 2003 में तीन भौतिकविदों ने दिखाया कि जो ब्रह्मांड औसतन फैलता रहा है, वह हमेशा से ऐसा नहीं करता रह सकता। उसके अतीत का एक किनारा है। दूसरा, तर्क: अगर अतीत की कोई शुरुआत न होती, तो आज से पहले अनगिनत दिन बीत चुके होते। एक अंतहीन श्रृंखला कभी पूरी नहीं हो सकती, इसलिए आज कभी आ ही नहीं सकता था। ग़ज़ाली ने नौ सदियाँ पहले यह तर्क दिया था। तीसरा, एक अनादि ब्रह्मांड भी अपने आप को नहीं समझा पाता। हिस्सों से बना और नियमों से चलने वाला ब्रह्मांड अपने अस्तित्व के लिए फिर भी किसी चीज़ पर निर्भर है। हर रास्ता एक ऐसी सत्ता तक ले जाता है जो अपने स्वभाव से मौजूद है, जिसे क़ुरआन सबसे पहला और सबसे आख़िरी कहता है।

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