संक्षिप्त उत्तर

नहीं। पूरे अर्थ में शून्य में न अंतरिक्ष होता है, न समय, न ऊर्जा और न नियम। उसमें कुछ भी करने की शक्ति नहीं होती, इसलिए वह कोई ब्रह्मांड पैदा नहीं कर सकता। जब कुछ भौतिकविज्ञानी कहते हैं कि ब्रह्मांड शून्य से आ सकता है, तो उनका मतलब कुछ और होता है। उनका मतलब होता है क्वांटम निर्वात, ऊर्जा का एक क्षेत्र जो भौतिकी के नियमों का पालन करता है। वह शून्य नहीं है। वह एक भौतिक चीज़ है, और उसे भी उतनी ही व्याख्या की ज़रूरत है जितनी ब्रह्मांड को। भौतिकी के दार्शनिक डेविड अल्बर्ट ने ऐसी एक किताब की समीक्षा करते हुए यही बात कही। इसलिए असली सवाल बना रहता है: कुछ भी है ही क्यों? एकमात्र उत्तर जो किसी बिना व्याख्या वाली चीज़ पर नहीं रुकता, वह एक ऐसी सत्ता है जो अपने स्वभाव से ही है। क़ुरआन यह विकल्प साफ़ रखता है: क्या वे बिना किसी चीज़ के पैदा हो गए, या वे स्वयं पैदा करने वाले हैं?

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