संक्षिप्त उत्तर

रोज़मर्रा के जीवन के क़ानून के रूप में नहीं। पहाड़ी उपदेश में, जैसा मत्ती ने दर्ज किया है, यीशु कहते हैं कि दूसरा गाल भी फेर दो और हर माँगनेवाले को दो। वे कहते हैं कि तलाक़शुदा स्त्री से विवाह करना व्यभिचार है, और अपने अनुयायियों से कहते हैं कि जो कुछ उनके पास है उसे बेच दें। मुसलमान ईसा का एक सच्चे नबी के रूप में सम्मान करते हैं, और इन लिखे हुए शब्दों को क़ुरआन की कसौटी पर परखते हैं। व्यवहार में, हर ईसाई देश में अदालतें, पुलिस और बैंक हैं। सबसे बड़ी कलीसियाएँ सिखाती हैं कि आत्मरक्षा जायज़ है और ईसाई संपत्ति रख सकते हैं। इस्लाम ऐसा क़ानून देता है जिसका लोग पालन कर सकें। वह धन का एक तय हिस्सा माँगता है, ईमानदार व्यापार की प्रशंसा करता है, और क्षमा की प्रशंसा करते हुए न्यायपूर्ण बदले की अनुमति देता है। वह तलाक़ और दोबारा विवाह की भी अनुमति देता है। क़ुरआन कहता है कि ईश्वर (﷾) किसी प्राणी पर उसकी क्षमता से अधिक भार नहीं डालता।

पूरी व्याख्या पढ़ें

अपने सहेजे गए पृष्ठ देखें