संक्षिप्त उत्तर

इस्लाम सिखाता है कि ईश्वर (﷾) ने आदम को मिट्टी से बनाया और उनमें जान फूँकी। उसने उन्हें चीज़ों के नाम सिखाए, और फ़रिश्तों से उनके आगे सजदा करने को कहा। इबलीस (शैतान) ने घमंड के कारण इनकार किया। ईश्वर (﷾) ने आदम की पत्नी को ख़ुद आदम से बनाया। मुसलमान उन्हें हव्वा कहते हैं। वे जन्नत में रहे और उनसे कहा गया कि एक पेड़ के पास न जाएँ। शैतान ने दोनों के मन में वसवसा डाला, और दोनों ने खा लिया। क़ुरआन यह नहीं कहता कि हव्वा ने आदम को बहकाया। फिर दोनों ने तौबा की, और ईश्वर (﷾) ने उन्हें माफ़ कर दिया। इसलिए कोई भी उनका पाप लेकर पैदा नहीं होता। हर जान केवल अपने लिए जवाबदेह है। ईश्वर (﷾) ने शुरू से ही धरती पर एक ख़लीफ़ा बसाने की योजना बनाई थी। आदम पहले मनुष्य थे, सब लोगों के पिता, और ईश्वर (﷾) के चुने हुए।

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