संक्षिप्त उत्तर

नहीं, यदि इस्लाम का संदेश उन तक पहुँचे और वे उसे ठुकरा दें। क़ुरआन उन यहूदियों और ईसाइयों को प्रतिफल का वादा करता है जो ईश्वर (﷾) और अंतिम दिन पर ईमान लाए और भलाई की। मुसलमान विद्वान इसे उन लोगों की प्रशंसा के रूप में पढ़ते हैं जिन्होंने पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) के आने से पहले अपने नबियों का अनुसरण किया। उनके आने के बाद उनका अनुसरण ईश्वर (﷾) तक का मार्ग बन गया। क़ुरआन कहता है कि जो कोई दूसरा धर्म तलाश करे, उससे ईश्वर (﷾) इस्लाम के सिवा कोई धर्म स्वीकार नहीं करेगा। पैगंबर (ﷺ) ने उस यहूदी या ईसाई की बात की जो उनके बारे में सुने और उनके संदेश को ठुकराते हुए मर जाए। उन्होंने कहा कि वह व्यक्ति आग वालों में से होगा। ईश्वर (﷾) जो पाप चाहे क्षमा कर देता है, सिवाय उसके साथ दूसरों की इबादत करने के। जो ईमान वाले अपने पापों के कारण जहन्नम में जाएँगे, उन्हें उससे निकाल लिया जाएगा। और क़ुरआन कहता है कि ईश्वर (﷾) किसी को तब तक दंड नहीं देता जब तक कोई रसूल उन तक न पहुँच जाए। वह फ़ैसला केवल ईश्वर (﷾) का है। मुसलमान किसी विशेष व्यक्ति के अंजाम की घोषणा नहीं करते, और क़ुरआन उन्हें हर धर्म के लोगों के साथ भलाई और न्याय का व्यवहार करने देता है (60:8)।

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