संक्षिप्त उत्तर

ईश्वर (﷾) दुख इसलिए होने देता है कि यह जीवन एक परीक्षा है, इनाम नहीं। ईमान वाला जो भी दर्द सहता है, वह बेकार नहीं जाता। क़ुरआन कहता है कि ईश्वर (﷾) ने मृत्यु और जीवन को पैदा किया ताकि परखे कि हम में किसका कर्म ज़्यादा अच्छा है। कठिनाई हमारे सब्र की परीक्षा लेती है, और आसानी हमारे शुक्र की। हम तस्वीर का केवल छोटा-सा हिस्सा देखते हैं, जैसा मूसा और ख़िज़्र की कहानी दिखाती है। बहुत-सा दुख इंसान इंसानों को देते हैं, क्योंकि ईश्वर (﷾) ने हमें सच्चा चुनाव दिया। जानवर भी भुलाए नहीं गए: क़ुरआन कहता है कि वे भी अपने रब की ओर इकट्ठे किए जाएँगे। पैगंबर (ﷺ) ने कहा कि काँटा चुभना भी ईमान वाले के कुछ पाप मिटा देता है। और मृत्यु हिसाब बंद नहीं करती। क़यामत के दिन, जब ईश्वर (﷾) सब लोगों को उठाएगा, हर अन्याय तौला जाएगा, एक कण के वज़न तक।

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