संक्षिप्त उत्तर

अबू बक्र, उमर, उस्मान और अली, पैगंबर (ﷺ) के बाद मुसलमानों के पहले चार अगुवा। इब्न कसीर जैसे विद्वान इनमें अली के बेटे हसन को जोड़ते हैं। पैगंबर (ﷺ) ने कहा था कि नुबुव्वत वाली ख़िलाफ़त तीस साल रहेगी। अबू बक्र (632-634), उनके सबसे क़रीबी साथी, ने उनकी मृत्यु पर ईमान वालों को संभाला और क़ुरआन को एक जिल्द में इकट्ठा करवाया। उमर (634-644) अपने इंसाफ़ के लिए मशहूर थे। उस्मान (644-656) ने उस क़ुरआन की प्रतियाँ हर क्षेत्र में भेजीं। अली (656-661), पैगंबर (ﷺ) के चचेरे भाई, ने अबू बक्र और उस्मान से बैअत की, और उसी तरह, समुदाय की बैअत से, पद सँभाला। फिर हसन ने वह सुलह की जिसकी भविष्यवाणी पैगंबर (ﷺ) ने की थी। पैगंबर (ﷺ) ने मुसलमानों से कहा कि वे उनकी सुन्नत और सही मार्ग पर चलने वाले ख़लीफ़ाओं की सुन्नत को थामे रहें।

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