संक्षिप्त उत्तर

इस्लाम में जन्नत अनंत आनंद का एक बाग़ है, जिसमें हमेशा रहना है। क़ुरआन ऐसे बाग़ों का वर्णन करता है जिनके नीचे नहरें बहती हैं, और जिनका विस्तार आकाश और धरती के बराबर है। वहाँ न कोई ग़म है, न थकान, न मृत्यु, और किसी के दिल में कोई कड़वाहट बाक़ी नहीं रहती। उसके लोगों के पास वह सब है जो वे चाहें, और उससे भी ज़्यादा। पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) ने कहा कि उसमें वह है जो न किसी आँख ने देखा और न किसी कान ने सुना। उन्होंने कहा कि उसमें एक पैर जितनी जगह भी पूरी दुनिया से बेहतर है। धरती पर सबसे कठिन जीवन जीने वाला ईमान वाला, उसमें एक बार डुबोया जाए, तो कहेगा कि उसने कभी कोई कठिनाई नहीं जानी। सबसे बड़ा आनंद यह है कि ईश्वर (﷾) उसके लोगों से प्रसन्न है। इंसान उसमें ईश्वर (﷾) की दया से दाख़िल होता है, जिसे वह ईमान और अच्छे कर्मों से माँगता है।

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