संक्षिप्त उत्तर

हदीसें उन बातों की रिवायतें हैं जो पैगंबर (ﷺ) ने कहीं, कीं और स्वीकार कीं। वे क़ुरआन की व्याख्या करती हैं और दिखाती हैं कि उस पर कैसे जिया जाए। उदाहरण के लिए, क़ुरआन मुसलमानों को नमाज़ पढ़ने का आदेश देता है, और हदीसें दिखाती हैं कि वे कैसे नमाज़ पढ़ते थे। उनके सहाबा ने उनके शब्द याद किए, और कुछ ने उन्हें लिख भी लिया। पैगंबर (ﷺ) ने उनसे कहा कि जो कुछ सुनें उसे आगे पहुँचाएँ। उन्होंने चेतावनी दी कि जो कोई जान-बूझकर उन पर झूठ बाँधे, वह अपना ठिकाना आग (जहन्नम) में बना ले। बाद के विद्वानों ने रिवायतें इकट्ठा कीं और हर एक के पीछे रावियों की कड़ी की जाँच की। हर रावी को ईमानदार और सटीक होना था, और हर कड़ी को जुड़ा होना था। सबसे प्रामाणिक संग्रह दो विद्वानों, बुख़ारी और मुस्लिम, के हैं। दूसरे संग्रहों में भी, जैसे अबू दाऊद और तिर्मिज़ी के संग्रहों में, बहुत सी सही रिवायतें हैं, जिनमें से हर एक को विद्वानों ने दर्जा दिया है। मुसलमान सही हदीसों से सीखते हैं कि पैगंबर (ﷺ) ने क़ुरआन पर कैसे जीवन बिताया।

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