संक्षिप्त उत्तर

इस्लाम मरयम को बाक़ी सब स्त्रियों से ऊपर सम्मान देता है। वे अकेली स्त्री हैं जिनका नाम क़ुरआन लेता है, और वह उनका नाम 34 बार लेता है। यह पूरे नए नियम से ज़्यादा बार है। क़ुरआन की एक सूरह उनके नाम से है। फ़रिश्तों ने उनसे कहा कि ईश्वर (﷾) ने उन्हें चुना, उन्हें पवित्र किया, और सारे संसार की स्त्रियों पर उन्हें चुना। वे उनके लिए एक बेटे की शुभ सूचना लाए। उन्होंने पूछा कि कैसे, जबकि किसी पुरुष ने उन्हें छुआ तक नहीं, और उनसे कहा गया कि ईश्वर (﷾) जो चाहता है पैदा करता है। जब उनकी क़ौम ने उन पर आरोप लगाया, तो शिशु ईसा ने पालने से बोलकर उनका बचाव किया। पैगंबर (ﷺ) ने उन्हें अपने समय की स्त्रियों में सबसे अच्छी कहा। मुसलमान उनका सम्मान करते हैं पर कभी उनकी इबादत नहीं करते, और कोई मुसलमान उनके बारे में आदर के सिवा किसी और ढंग से बात नहीं कर सकता।

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