संक्षिप्त उत्तर

इस्लाम सिखाता है कि सपने तीन तरह के होते हैं। अच्छा सपना ईश्वर (﷾) की ओर से ख़ुशख़बरी है। परेशान करने वाला सपना शैतान की ओर से आता है। कुछ सपने बस मन का अपने आप से बात करना हैं। जो मुसलमान बुरा सपना देखे, वह ईश्वर (﷾) की पनाह माँगता है और किसी को नहीं बताता, और वह उसे नुक़सान नहीं पहुँचाएगा। पैगंबर (ﷺ) ने कहा कि जो उन्हें सपने में देखता है, उसने सचमुच उन्हीं को देखा, क्योंकि शैतान उनका रूप नहीं ले सकता। एक आरंभिक विद्वान इब्न सीरीन ने जोड़ा कि यह बात तभी लागू होती है जब उन्हें वैसा ही देखा जाए जैसे वे सचमुच दिखते थे, और उनका रूप विस्तार से दर्ज किया गया है। लेकिन सपना कभी किसी धर्म का प्रमाण नहीं होता। इस्लाम पैगंबर (ﷺ) को दी गई वह्य पर टिका है, उनके अनुयायियों के सपनों पर नहीं।

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