संक्षिप्त उत्तर

वे बड़े पापों से सुरक्षित रखे गए थे। इस्लाम सिखाता है कि ईश्वर (﷾) ने हर नबी को बड़े पाप से और अपना संदेश पहुँचाने में किसी भी भूल से बचाए रखा। क़ुरआन पैगंबर (ﷺ) से कहता है कि वे अपने से पहले के नबियों के मार्गदर्शन का अनुसरण करें, इसलिए उनका अनुसरण के योग्य होना ज़रूरी था। बाइबिल एक अलग कहानी बताती है। उसमें हारून सोने का बछड़ा बनाते हैं। उसमें लूत की बेटियाँ उन्हें शराब पिलाकर मतवाला करती हैं और उनसे गर्भवती होती हैं। उसमें दाऊद व्यभिचार करते हैं और उस औरत के पति को मौत के मुँह में भेज देते हैं। उसमें सुलैमान दूसरे देवताओं की ओर मुड़ जाते हैं। क़ुरआन इनमें से हर व्यक्ति का सम्मान करता है। वह बछड़े का दोष एक दूसरे व्यक्ति, सामिरी, पर डालता है। वह साफ़ कहता है कि सुलैमान ने कुफ़्र नहीं किया। बाइबिल भी लूत को धर्मी कहती है और दाऊद को आज्ञापालन का आदर्श बताती है। इस्लाम का वृत्तांत ही वह है जो सुसंगत बैठता है।

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