संक्षिप्त उत्तर

हाँ। इतिहासकारों का अनुमान है कि ज़ंजीरों में बाँधकर अटलांटिक पार ले जाए गए अफ़्रीकियों में से लाखों मुसलमान थे। ग़ुलामों के व्यापार के रास्ते पश्चिमी अफ़्रीका के मुस्लिम इलाक़ों तक जाते थे, और इनमें से बहुत-से मुसलमान अरबी पढ़-लिख सकते थे। 1731 में बेचे गए एक आदमी ने याद से तीन बार क़ुरआन लिखा। एक दूसरे ने अपनी जीवन-कथा अरबी में लिखी, और वह लाइब्रेरी ऑफ़ कांग्रेस में रखी है। उनमें से लगभग किसी को भी मुसलमान बने रहने नहीं दिया गया। 1685 के एक फ़्रांसीसी क़ानून ने फ़्रांसीसी द्वीपों के हर ग़ुलाम का बपतिस्मा करने का आदेश दिया। कुछ ही पीढ़ियों में उनके वंशज ईसाई हो गए। कोई इसे ईसाई धर्म का शांतिपूर्ण प्रसार नहीं कहता। फिर भी इस्लाम, जो सबसे बड़े मुस्लिम देश तक व्यापारियों के ज़रिए पहुँचा, वह धर्म है जिस पर बल से फैलने का आरोप लगाया जाता है।

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