संक्षिप्त उत्तर

इस्लाम नया नहीं है। क़ुरआन सिखाता है कि आदम से मुहम्मद (ﷺ) तक हर पैगंबर एक ही आस्था लाया: केवल एक ईश्वर (﷾) की उपासना करो और उसके रसूल का अनुसरण करो। इस्लाम का अर्थ है ईश्वर (﷾) के प्रति समर्पण, इसलिए जिस भी ईमान वाले ने ऐसा किया वह इस अर्थ में मुसलमान था। क़ुरआन इब्राहीम को समर्पण करने वाला कहता है, और ईसा के हवारियों ने कहा कि उनके मुसलमान होने की गवाही दी जाए। हर पैगंबर अपनी क़ौम के पास अपने समय के धर्मग्रंथ के साथ आया, जैसे मूसा की तौरात और ईसा की इंजील। मूसा के समय का ईमान वाला मूसा का अनुसरण करता था। ईसा के समय का ईमान वाला ईसा का अनुसरण करता था। मुहम्मद (ﷺ) अंतिम पैगंबर हैं, जिन्हें सारी मानवजाति की ओर भेजा गया। इसलिए आज कोई व्यक्ति उनका और क़ुरआन का अनुसरण करके ईश्वर (﷾) के प्रति समर्पण करता है।

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