संक्षिप्त उत्तर

नहीं। इस्लाम शरीर को नुक़सान पहुँचाने से मना करता है, और क़ुरआन लड़कियों के खतने का कहीं ज़िक्र नहीं करता। महिला जननांग विकृति (FGM) को ख़त्म करने के लिए काम करनेवाली संयुक्त राष्ट्र की संस्थाएँ कहती हैं कि इस्लाम, ईसाई धर्म या यहूदी धर्म का कोई पवित्र ग्रंथ इसका आदेश नहीं देता। वे कहती हैं कि यह ईसाइयों, यहूदियों और मुसलमानों में पाई जाती है, और यह ईसाई धर्म और इस्लाम दोनों से पुरानी है। FGM का अर्थ है बिना किसी चिकित्सीय कारण के किसी लड़की के जननांग को काटकर हटाना या उसे चोट पहुँचाना। इसका कोई ज्ञात स्वास्थ्य लाभ नहीं है और यह स्थायी नुक़सान करती है। मिस्र की आधिकारिक फ़तवा संस्था कहती है कि यह इस्लाम में हराम होने के साथ-साथ ग़ैर-क़ानूनी भी है। ब्रिटेन, अमेरिका और बहुत से दूसरे देशों में यह अपराध है। मुसलमान जहाँ भी रहें क़ानून का पालन करते हैं, क्योंकि क़ुरआन उन्हें उनके समझौतों से बाँधता है (17:34)। जिस किसी को डर हो कि कोई लड़की ख़तरे में है, उसे पुलिस को बताना चाहिए।

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